ज्ञानवापी मस्जिद विवाद का प्राचीन इतिहास, जानिए कब, क्या हुआ | Gyanvapi Masjid Case

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ज्ञानवापी मस्जिद
ज्ञानवापी मस्जिद

आज हम सबसे पहले ज्ञानवापी मस्जिद विवाद का प्राचीन इतिहास आपके लिए संपूर्ण विशेषण करेंगे वैसे तो यह बाद 353 वर्षों पुराना है। लेकिन पिछले 24 घंटों से इस पर काफी चर्चा हो रही है। और इसका कारण है वाराणसी के सिविल कोर्ट द्वारा सुनाया गया एक फैसला अदालत ने 14 मई ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वेक्षण के आदेश दिए।

हमारे देश के बहुत सारे कट्टरपंथी बुद्धिजीवी विपक्षी नेता इससे अचानक से परेशान हो गए हैं, और खुद को सहनशीलता का चैंपियन बताने वाले इन लोगों को यह फैसला नहीं हो रहा है। जब मंदिर तोड़कर या मुगल शासक औरंगजेब ने मस्जिद बनवाई थी तब किसी को कोई आपत्ति नहीं थी। सैकड़ों वर्षो तक इस पर किसी ने कुछ नहीं कहा लेकिन अब जब इस मामले में न्याय की बात हो रही है। जांच की बात हो रही है तो इन लोगों को अचानक से तकलीफ होने लगी है और अकबरुद्दीन ओवैसी ने महाराष्ट्र के औरंगाबाद में औरंगजेब की कब्र पर जाकर बाकायदा कल चादर भी चढ़ाई है इसका क्या मायने हैं आज ही समझेंगे।

वाराणसी कोर्ट के आदेश के बाद ज्ञानवापी मस्जिद में अब कल सर्वे किया जाएगा सर्वे कराने से पहले प्रशासन ने सभी पक्षकारों के साथ बैठक की और शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की। कमीशन की कार्रवाई को लेकर पक्षकारों को बुलाया गया था कि जो कमीशन की कार्रवाई है उस के दौरान सारे कॉर्पोरेट करें और शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखें। इसी बीच ज्ञानवापी मस्जिद में जुम्मे की नमाज भी पढ़ी गई। किसी किस्म की गड़बड़ी न हो इसके लिए वहां भारी तादाद में सुरक्षा बल भी तैनात रहे। हालांकि मुस्लिम पक्ष की तरफ से सर्वे को रुकवाने और यथास्थिति बनाए रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सर्वे पर रोक लगाने और तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया।  ज्ञानवापी सर्वे के बीच आज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी 

वाराणसी कोर्ट के आदेश के बाद ज्ञानवापी मस्जिद में अब कल सर्वे किया जाएगा सर्वे कराने से पहले प्रशासन ने सभी पक्षकारों के साथ बैठक की और शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की। कमीशन की कार्रवाई को लेकर पक्षकारों को बुलाया गया था कि जो कमीशन की कार्रवाई है उस के दौरान सारे कॉर्पोरेट करें और शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखें। इसी बीच ज्ञानवापी मस्जिद में जुम्मे की नमाज भी पढ़ी गई। किसी किस्म की गड़बड़ी न हो इसके लिए वहां भारी तादाद में सुरक्षा बल भी तैनात रहे। हालांकि मुस्लिम पक्ष की तरफ से सर्वे को रुकवाने और यथास्थिति बनाए रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सर्वे पर रोक लगाने और तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया।  ज्ञानवापी सर्वे के बीच आज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी 

मंत्री योगी आदित्यनाथ काशी नगरी पहुंचे मुख्यमंत्री योगी यहां 2 दिन तक रहेंगे सीएम योगी आदित्यनाथ वाराणसी पहुंचते ही जंगमबाड़ी मठ पहुंचे जनवरी माह से उनका पुराना नाता है। काशी पीठ के कार्यक्रम में शामिल होने आए थे।

आरंभ सबसे पहले आपको काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद मामले में आए अदालत के महत्वपूर्ण फैसले के बारे में बताएंगे भी समझाएंगे और उसका  विश्लेषण भी करेंगे।

इसने हमारे देश के कट्टरपंथी बुद्धिजीवी और निमृत को बहुत परेशान कर दिया है।  वाराणसी सिविल कोर्ट ने इस मामले में 14 मई यानी कल से ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वे कराने के आदेश दिए जिसकी रिपोर्ट 17 मई तक अदालत में पेश की जाएगी।‌‍‍

अगर कोई व्यक्ति मस्जिद परिसर में सर्वे करने का विरोध करता है या वीडियो वीडियो ग्राफी को लेकर विरोध जताता है। तो उसके खिलाफ एफ आई आर दर्ज की जा सकती। अलावा इस कार्रवाई में 5 सीटों का सर्वे किया जाएगा और इस दौरान या मौजूद सभी शैतानों की वीडियोग्राफी होगी जाएंगे ताकि पता चल सके कि यहां हिंदू देवी देवताओं की मूर्तियां मौजूद है या नहीं।

ज्ञानवापी मस्जिद कहां है? यह पूरा व्यवहार वैसे तो 353 वर्ष पुराना है लेकिन पिछले 24 घंटों से इस पर हमारे देश में बहुत चर्चा हो रही है और आप सब भी चाहे देश के किसी भी कोने में रहते हो आपको भी जरूर इच्छा होगी कि आपको इस विवाद के बारे में सारी जानकारी होनी चाहिए।  हिंदू का कहना है कि मुगल शासक औरंगजेब 1679 में काशी विश्वनाथ मंदिर को ध्वस्त करके यहां पर ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण कराएं गया था। आजकल मस्जिद है वहां पहले भगवान शिव को समर्पित असली ज्योतिर्लिंग मौजूद लेकिन बाद में औरंगजेब ने मंदिर को तुडवा दिया और यहां पर मस्जिद बनवा दी और अब अदालत ने इसी कड़ी के अंश जोड़ने के लिए कोर्ट ने 3 कमिश्नर नियुक्त किए हैं। 

अभी मामला ज्ञानवापी परिसर में स्थित श्रृंगार गौरी मंदिर को लेकर है। हिंदू पाकिस्तान ओं का दावा है कि मस्जिद में श्रृंगार गौरी भगवान गणेश, हनुमान, आदि विश्वेश्वर नंदी जी समेत कई हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां हैं और हिंदू पक्ष का शृंगार गौरी मंदिर में साल के 365 दिन पूजा अर्चना करने की मांग है। ताकि मुस्लिम पत्रकारों ने इस दावे को गलत बताया है। यह कहते हैं कि श्रृंगार गौरी की मूर्ति मस्जिद की दीवार के बाहर है। मस्जिद में जाकर सर्वे करवाने की कोई आवश्यकता है ही नहीं। बड़ी बात यह है कि इस मामले में रवि कुमार दिवाकर अपनी सुरक्षा को लेकर डरे हुए हैं। अब समय आ गया है  कि सांप्रदायिक मामलों पर इस तरह के मंदिर और मस्जिद जैसे विवादों पर अपना आदेश सुनाने में अदालतों को भी डर लगने लगा है। जिसको भी डर लगने लगा उन्होंने अपने आदेश में कहा है कि एक साधारण केस में भी डर का एक ऐसा माहौल बना दिया गया है कि वह अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित है। सोचिए यह जज कह रहा है। देश में एक जज को इसलिए डाला जा रहा है क्योंकि वह अपना काम निष्पक्ष होकर कर रहा है रवि कुमार वही जय-जय गैरों ने इस मामले में कोर्ट कमिश्नर को बदलने की मांग खारिज कर दी थी जिसके बाद उन्हें धमकियां दी गईं और उन्होंने अपने आदेश में भी किया है और इस आदेश की कॉपी आज मैं अपने साथ लाया हूं इस बारे में लिखा है कि इस केस में कुछ लोगों द्वारा जड़ का माहौल पैदा कर दिया गया है और यह डर इतना है कि वह अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित।

समझने वाली बात यहां पर यह है कि 500 वर्षों के इंतजार के बाद अयोध्या में श्री राम मंदिर के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और बाबरी मस्जिद और राम जन्म भूमि का विवाद इतिहास की बात बन चुका है। लेकिन हमारे देश में अब भी कई मंदिर और मस्जिद का विवाद अभी समाप्त नहीं हुआ है। जिनकी जांच होनी बाकी है हैरानी की बात यह हैरानी की बात यह भी है कि इनमें से ज्यादातर विवादित धार्मिक स्थल उत्तर भारत में स्थित है। जबकि दक्षिण भारत में आपको ऐसे बहुत ही कम प्राचीन मंदिर दिखाई देंगे जिनको तोड़ कर वहां पर मस्जिद बना दी गई है। 

ऐसा इसलिए है कि 800 वर्षों के दौरान जिन मुसलमान आक्रमणकारियों ने भारत पर अनगिनत हमले किए को दक्षिण भारत पर अपना प्रभाव उस तरह से नहीं जमा पाए जिस तरह से उन्होंने उत्तर भारत में अतिक्रमण किया। भारत मंदिरों की जगह या उनके आसपास मस्जिद बना दी गई और अब भारत में करते हैं या मंदिर के साथ ही मंदिर या मस्जिद के साथी मंदिर बने हुए सोचना चाहिए कि क्या यह मात्र एक संयोग है या फिर बाहर से आए आक्रमणकारियों ने अपनी सभ्यता को भारत के बहुसंख्यक लोगों पर जबरदस्ती रोकने के लिए यह प्रयोग किया। 

उदाहरण के लिए 5 वर्ष पहले हिंदुओं की आस्था के केंद्र अयोध्या में राम मंदिर की जगह बाबरी मस्जिद बना दी गई थी।

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